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उत्तराखण्ड में नैनीताल के ओखलकांडा में 21वीं सदी का सबसे शर्मनाक दृश्य देखने को मिली है। यहां एक घायल महिला को डोली में लादकर चार किलोमीटर दूर मोटर मार्ग तक ले जाया गया। महिला को सड़क में खड़े वाहन से हल्द्वानी स्थित अस्पताल ले जाया गया। क्षेत्रीय लोग अब सड़क मार्ग निर्माण की मांग करते हुए मंत्री को हैशटैग कर रहे हैं।
सोशियल मीडिया में ऋषभ सिंह रावत ने डोली में घायल महिला को ले जाती पोस्ट डाल सरकार के आगे कई सवाल खड़े किए हैं। आयुक्त दीपक रावत के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित जगह रहना चाहिए, जबकी पैदल मार्गों को पी.एम.जी.एस.वाई.के फेज4 में प्रस्तावित किया जा रहा है।
ऊत्तराखण्ड निर्माण के 26 वर्ष बाद भी घायल, बीमार, गर्भवती या मजबूर को दांडी में पैदल ले जाने की तस्वीरें कोई नई बात नहीं हैं। यहां अक्सर ऐसे दृश्य सोशियल मीडिया या मीडिया के माध्यम से दिखाई दे जाते हैं। इससे पहले भी कुछ वाइरल वीडियो में नैनीताल के बेलुवाखान तल्ला से बल्दीयाखान मोटरमार्ग तक पहुंचने के लिए दर्जनों गांव के लोगों को पैदल मार्ग का सहारा लेते, नैनीताल जिले में ओखलकांडा के देना गांव में नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचने के लिए 9 किलोमीटर पैदल चलना। ओखलकांडा ब्लॉक के महतोली समेत अन्य गांवों के लोग आज 21वीं सदी में भी मोटर मार्ग से कोसों दूर हैं। उनके मकान आज भी किसी सड़क या मोटर मार्ग से मीलों दूर हैं। यहां किसी मुसीबत के समय घायल, बीमार या मजबूर को डोली से ही ले जाया जाता है। नैनीताल से महज 30 किलोमीटर दूर रामगढ़ क्षेत्र के उमागढ़ मार्ग भारी बरसात में टूटने से गांव के 200 से अधिक लोग पैदल चलने को मजबूर हो गए।
यहां से लोग हर रोज बाजार, स्कूल, कार्यालय और अस्पताल आते जाते हैं । बीमार होने पर वृद्ध महिला समेत अन्य को डांडी में बैठाकर उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों से होकर ले जाया जाता है। नैनीताल जिले में भीमताल के मलुवाताल स्थित कसैला तोक में मजबूर लोगों को डोली के सहारे नजदीकी मोटर मार्ग तक लाया जाता है।
बागेश्वर जिले में कपकोट के दुर्गम बीथि गांव में मजबूर को 5 किमी डोली में रखकर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाया जाता है। भीमताल और धारी ब्लॉक के बबियाड गांव के लोग आज भी लगभग पाँच किलोमीटर चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं। नैनीताल से लगभग 10 किलोमीटर दूर सौलिया और तल्ला कुण गांव हैं जहां लगभग 4 किलोमीटर पक्की सड़क नहीं है। यहां से लोगों को डोली के माध्यम से परिवहन किया जाता है।
उत्तराखण्ड में चारधाम दर्शनों के लिए आए महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के.आर.श्रीराम ने यहाँ के उच्च न्यायालय को सुझाव देते हुए चारधाम यात्रा की कई खामियां बताई। कहा कि उन्होंने खच्चर से जबकि उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने दांडी से पहाड़ों के मट्टी भरे और पथरीले मार्ग से यात्रा की। सुझावी पत्र का संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इसे जनहित याचिका के रूप में लिया था।RoadConnectivity
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