खनन नियमावली को हाईकोर्ट में चुनौती_ रॉयल्टी वसूली निजी हाथों में क्यों ?

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स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- उत्तराखंड उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के एक निजी कंपनी को खनन की रॉयल्टी वसूलने और बिना टेंडर के खनन पट्टे देने संबंधी नियमावली को चुनौती देती याचिका पर राज्य सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा है कि पूर्व में हुई सुनवाई के निर्देशों के क्रम में अब तक क्या कार्यवाही हुई ? मामले की सुनवाई 3 सप्ताह बाद होनी तय हुई है।


याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया कि हल्द्वानी निवासी संतोष सिंह हर्नवाल ने उच्च न्यायालय में उत्तराखंड में खनन रॉयल्टी वसूलने के लिए और कुछ खनन पट्टों को बिना टेंडर प्रक्रिया के स्वीकृत करने के लिए बनाई गई नियमावली को चुनौती देती याचिका दायर की।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने खनिज परिवहन नियमों में संशोधन कर रॉयल्टी वसूलने का काम निजी हाथों में दे दिया। इतना ही नहीं, टेंडर में सबसे कम बोली लगाने वाली L1 कंपनी को खाली पड़े खनन पट्टों का काम भी सौंपने का प्रावधान किया। जबकि रॉयल्टी वसूलना राज्य का संवैधानिक कार्य है, इसे निजी कंपनी को देना राज्य के हितों के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यायालय ने पूर्व में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वो खनन के लिए एक अलग कॉरपोरेशन बनाने पर विचार करे, जिसपर अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई है।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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