झूठे वादों और आश्वासन से दुखी ग्रामीणों ने किया पंचायत चुनाव के बहिष्कार का ऐलान

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सरोवर नगरी नैनीताल से चंद किलोमीटर दूर बसे गांव के लोग कच्ची सड़क के दर्द से दुखी होकर आगामी पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दे रहे हैं।


नैनीताल से लगभग 10 किलोमीटर दूर सौलिया और तल्ला कुण गांव हैं जहां लगभग 4 किलोमीटर पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीण इस मांग को कई वर्षों से कर रहे हैं। वो अपने गाँव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए अपने प्रत्यावेदन सरकार और प्रशासन को देते देते थक गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव आते ही जनप्रतिनिधि उनकी मांगों को उच्च स्तर पर रखने का अस्वाशन देते हैं, लेकिन जीतने के बाद वो अपने वादे को भूल जाते हैं। गाँव के मुख्य मार्ग से नहीं जुड़े होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं, छात्र छात्राओं और बुजुर्गों को डोली में ले जाया जाता है। गाँव की सब्जी, फल, दूध आदि को नजदीकी शहर तक पहुंचाने में बहुत समय लग जाता है, जिससे उत्पाद खराब भी हो जाते हैं। अपना दुख व्यक्त करते हुए ग्रामीण हरीश गाड़िया ने बताया कि भारी सामान को घोड़ो के माध्यम से उफनते नाले पार करते हुए मुख्य सड़क तक पहुंचा जाता है। ये एक बड़ी चुनौती से कम नही है। सड़क के आभाव में स्थानीय लोगों के साथ स्कूली बच्चों को भी हर रोज पैदल ही इन उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों से गुजरकर आना जाना पड़ता है।
इस वर्ष सौलिया और तल्ला कुण गांव के लोगों ने पंचायत चुनाव बहिस्कार की घोषणा की है। ग्रामीणों ने बताया कि 2021 को हुई अतिवृष्टि से जो नुकशान हुए, उसके संबंध में प्रशासन को प्रत्यावेदन दिए थे, लेकिन इनकी सुध अबतक नहीं ली गई है। अब मजबूर होकर ग्रामीण आंदोल की राह जाने की ठान रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि 2021की अतिवृष्टि में उनके पेयजल टैक और पाइप लाईन का कार्य अतिवृष्टि में बह गया। ग्रामीण किशन भाकुनी ने बताया कि ग्राम सौलिया का मुख्य मार्ग में बना पुल्ल भी अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गया, ग्रामीणों की सिचाई कि नहर भी आपदा में बह गई, 6 घरों को खतरा पैदा हो गया है जिसमें 3 परिवार मुख्य रूप में खतों की जड़ में है, गांव में बिजली के खंबे खतरे में हैं जो कि अपनी जगह से खुले नाले में लटके हैं, साथ ही 2023 में रूसी के एस.टी.पी.का एक हिस्सा टूटने से सौलिया गांव में खतरा बन गया है।
किरन मेहरा का कहना है कि उन्हें मोटरमार्ग नसीब नहीं हुआ है। उन्हें अपने रोजमर्रा के कार्यो के लिए 4 किलोमीटर पैदल उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तो से चलकर जाना पड़ता है। उन्होंने रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ ही पंचायत चुनाव बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

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