आशाओं के हक की लड़ाई तेज, देहरादून में होगा बड़ा प्रदर्शन

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हल्द्वानी, 17 अगस्त। उत्तराखंड की आशा हेल्थ वर्कर्स ने अपने हक और सम्मान की लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है। हल्द्वानी में हुई ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में तय किया गया कि 22 नवंबर को देहरादून में होने वाले विशाल प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ शामिल होंगी।

बैठक की शुरुआत ऐक्टू के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे कामरेड निशान सिंह को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उनके 18 जुलाई 2026 को निधन पर कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया।

बैठक को संबोधित करते हुए ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM का बजट घटाए जाने से आशा कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण की राह में बाधा खड़ी हो रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान आशाओं ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी उनके काम की सराहना की थी।

राजीव डिमरी ने कहा कि आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय उन पर लगातार काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उनके मुताबिक आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के खिलाफ मजदूरों और स्कीम वर्कर्स को एकजुट होकर बड़े संघर्ष की जरूरत है।

वहीं, भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने उत्तराखंड सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि विधायकों के वेतन-भत्ते लगातार बढ़ाए जा रहे हैं और उन्हें पेंशन भी मिल रही है, जबकि आशा कार्यकर्ता दिन-रात मातृ एवं शिशु सुरक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के तमाम अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि आशाओं को मिलने वाला मानदेय बेहद कम है और केंद्र व राज्य सरकारों को उनके लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान कर सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित करना चाहिए।

ऐक्टू के प्रदेश महामंत्री केके बोरा ने कहा कि आशा जैसी महिला कामगारों के साथ आर्थिक शोषण हो रहा है और उनसे लगातार काम लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान की बात करने वाली सरकार का महिला श्रम के प्रति ऐसा रवैया गंभीर सवाल खड़े करता है।

आशा यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से 31 अगस्त 2021 को खटीमा स्थित कैंप कार्यालय में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से हुई वार्ता का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने मासिक मानदेय तय करने और डीजी हेल्थ उत्तराखंड की ओर से आशाओं के संबंध में तैयार प्रस्ताव को लागू करने का आश्वासन दिया था।

उन्होंने सरकार से आशाओं को 11,500 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने के वादे को तत्काल पूरा करने की मांग की। कमला कुंजवाल ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर आशा कार्यकर्ता आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगी।

बैठक में 22 नवंबर को देहरादून में प्रस्तावित विशाल रैली की तैयारियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यूनियन ने स्पष्ट किया कि आशा हेल्थ वर्कर्स इस प्रदर्शन में पूरी ताकत के साथ भाग लेंगी।

बैठक में राजीव डिमरी, इंद्रेश मैखुरी, केके बोरा, कमला कुंजवाल, रीता कश्यप, सरस्वती पुनेठा, मीना आर्य, बबीता कश्यप, अनीता अन्ना, बबीता सिनग्वाल, राधा देवी, रूप किशोरी और लीला बिष्ट समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन यूनियन महामंत्री डॉ. कैलाश पाण्डेय ने किया।

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