हल्द्वानी। उत्तराखंड के छात्रसंघ चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की कैंपस राजनीति का नया ट्रेंड सेट कर दिया है। गढ़वाल मंडल में जहां ABVP ने अपनी मजबूत पकड़ कायम रखते हुए सबसे ज्यादा अध्यक्ष पद जीते, वहीं कुमाऊं मंडल में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों बड़े छात्र संगठनों को सीधी चुनौती देते हुए सबसे ज्यादा अध्यक्ष पदों पर कब्जा किया। MBPG डिग्री कॉलेज सबसे बड़े राजनीतिक उलटफेर हुआ।
कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय MBPG में ABVP से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल ने 466 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद जीतकर पिछले नौ साल से चले आ रहे ABVP के वर्चस्व को खत्म कर दिया। 18 राउंड की मतगणना में आर्यन को 1,723 वोट, NSUI के मेहुल शाह को 1,257 और ABVP के अधिकृत प्रत्याशी धीरज बिष्ट को 988 वोट मिले। यानी जिस चुनाव को शुरुआत में ABVP बनाम NSUI की सीधी टक्कर के रूप में देखा जा रहा था, उसमें एक बागी प्रत्याशी ने दोनों संगठनों को पीछे छोड़कर अध्यक्ष की कुर्सी अपने नाम कर ली।
MBPG में बगावत ने बदली पूरी बाजी
आर्यन बेलवाल की जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि MBPG की छात्र राजनीति में बड़ा बदलाव है। पहले राउंड से लेकर अंतिम राउंड तक आर्यन ने अपनी बढ़त बनाए रखी। मतगणना के दौरान बैलेट पेपर फाड़े जाने की घटना के बाद करीब एक घंटे तक गिनती रुकी, लेकिन इसके बावजूद चुनावी माहौल थमा नहीं।
देर रात करीब 12:30 बजे परिणाम घोषित होने के बाद आर्यन ने अध्यक्ष पद की शपथ ली।
कुमाऊं में निर्दलीयों की ताकत उभरी
कुमाऊं मंडल के 51 कॉलेजों में अध्यक्ष पद के नतीजों ने साफ संकेत दिया कि छात्र राजनीति में निर्दलीय प्रत्याशियों की जमीन मजबूत हुई है। यहां निर्दलीयों ने 25 अध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की, जबकि ABVP के 16 और NSUI के 7 प्रत्याशी अध्यक्ष बने।
कई कॉलेजों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने ABVP और NSUI जैसे स्थापित छात्र संगठनों को सीधी चुनौती दी। MBPG का नतीजा इस ट्रेंड का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया, जहां संगठन से निकला बागी प्रत्याशी ही संगठन के अधिकृत प्रत्याशी पर भारी पड़ गया।
गढ़वाल में ABVP का दबदबा कायम
इसके उलट गढ़वाल मंडल में ABVP ने अपनी पकड़ मजबूत रखी। 55 डिग्री कॉलेजों में ABVP ने 23 अध्यक्ष पद जीते, जबकि NSUI को 17 और अन्य प्रत्याशियों को 15 कॉलेजों में अध्यक्ष पद मिला। यानी गढ़वाल में संगठन आधारित छात्र राजनीति का प्रभाव ज्यादा मजबूत दिखाई दिया।
देहरादून के DAV PG कॉलेज में ABVP के नवदीप राणा ने अध्यक्ष पद जीतकर लगातार दूसरी बार संगठन का अध्यक्ष चुना जाना सुनिश्चित किया। हालांकि महासचिव पद पर निर्दलीय नीलांश शर्मा की जीत ने यहां भी छात्र राजनीति में स्वतंत्र उम्मीदवारों की मौजूदगी का संकेत दिया। DBS कॉलेज में NSUI ने अध्यक्ष पद अपने नाम किया।
अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ तक मिली-जुली तस्वीर
अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और अन्य महाविद्यालयों के परिणाम भी छात्र राजनीति के अलग-अलग रंग दिखाते हैं। SSJ परिसर अल्मोड़ा में ABVP के रोहित कुमल्टा विजयी रहे। सोमेश्वर में प्रियंका जोशी और बड़कोट में ABVP समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वहीं रानीखेत में निर्दलीय विनीत कुंवरबी, भिकियासैंण में तानिया मठपाल, द्वाराहाट में हिमांशी बिष्ट और स्याल्दे में हेमंत सिंह अध्यक्ष चुने गए।
पुरोला और मोरी में NSUI प्रत्याशियों ने बाजी मारी। पिथौरागढ़ के राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट में दीया समेत अन्य प्रमुख पदों पर ABVP समर्थित प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। चुनाव परिणाम के बाद नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
पौड़ी में भी बदली तस्वीर
ऋषिकेश में अध्यक्ष पद पर वैभव रावत विजयी रहे। वहीं उपाध्यक्ष निकिता प्रजापति, महासचिव रेहान बिंदोलिया, सह सचिव कशिश राजपूत, कोषाध्यक्ष अंजली कोठियाल और विश्वविद्यालय प्रतिनिधि कुणाल नेगी चुने गए।
पौड़ी के सतपुली महाविद्यालय में NSUI ने पूरे पैनल पर निर्विरोध जीत दर्ज की, जबकि कोटद्वार में वंदे मातरम छात्र संगठन के मनीष नेगी अध्यक्ष बने। रुड़की के KLDAV कॉलेज में NSUI ने अध्यक्ष समेत चार पद अपने नाम किए।
श्रीनगर में पहले ही दिख चुका था बदलाव
इससे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर के तीनों परिसरों में हुए छात्रसंघ चुनाव में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। यहां NSUI ने ABVP का सूपड़ा साफ करते हुए शानदार जीत दर्ज की थी।अब MBPG में निर्दलीय आर्यन बेलवाल की जीत ने इस चुनावी कहानी में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है।
इन नतीजों को केवल जीत-हार के आंकड़ों से देखना तस्वीर को अधूरा छोड़ देगा। कैंपस की राजनीति में छात्र अब सिर्फ संगठन के नाम पर वोट नहीं कर रहे, बल्कि चेहरे, स्थानीय पकड़, व्यक्तिगत संपर्क और अपनी आवाज उठाने वाले नेतृत्व को भी तरजीह दे रहे हैं। MBPG के रिजल्ट ने नया ट्रेंड सेट कर दिया है।





