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उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर को निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ मामले में सुनवाई कर उन्हें कोई राहत नहीं देते हुए अगली सुनवाई 20 जुलाई के लिए तय की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धारत साह की खण्डपीठ में हुई।
आरोपियो की तरफ से कहा गया कि मृतक ने खुदकुशी की है और उनका इसमें कोई हाथ नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाय। वहीं मृतक और सरकार की तरफ से कहा गया कि घटना घटित होने के बाद होटल के कमरे को तोड़ दिया गया। बुल्डोर चलाया गया। आगजनी करके सारे सबूत मिटा दिए गए। व्हाट्सअप चैट भी इनके खिलाफ हैं। अगर इनका कोई हाथ नहीं था तो सारे सबूत क्यों मिटा दिए गए ? इसलिए इनकी याचिकाओ को निरस्त किया जाय। अभियुक्तों ने कोटद्वार कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा के आदेश को चुनौती दी है जिसमे उनके द्वारा जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना की गई है।
मामले के अनुसार, अरोपियों को कोटद्वार कोर्ट ने दिनांक 30 मई 2025 को आई.पी.सी. की धारा 302, 354अ और 201 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान 47 गवाह पेश किए गए थे। जिसके खिलाफ उनके द्वारा इस आदेश को उच्च न्यायलय में चुनौती दी गयी। आरोपी की तरफ से कहा गया है कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह पेश नही किया गया। मृतक का शव कैनाल से बरामद हुआ था। अभियोजन पक्ष की तरफ से कहा गया था कि आरोपी व उसके दो अन्य साथियों की लोकेशन घटना स्थल पर पाई गई थी। फोरेंसिक जांच में भी इनकी लोकेशन वहाँ पाई गई। यही नहीं, मृतिका ने अपने व्हाट्सएप चैट में भी इसका जिक्र किया है। आरोपियो ने रिसॉर्ट के सी.सी.टी.वी.कैमरे बंद करा दिए गए और डीवीआर से भी छेड़ाखानी की ।
पौड़ी जिले के डोभ श्रीकोट की अंकिता भंडारी वनंत्रा रिसोर्ट ऋषिकेश में नौकरी करती थी। जिसकी हत्या आरोपी रिसोर्ट स्वामी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित ने चीला बैराज में धक्का देकर की थी। मामले की छानबीन के बाद तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तभी से अभियुक्त जेल में बंद है।



