रिश्तों के भरोसे, विश्वास और इंसानियत को झकझोर देने वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपने पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मेरठ की अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जुड़े थे। सजा की घोषणा के बाद दोनों के रोने की बात भी सामने आई।
यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं था। इसमें पति की हत्या, शव को टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में छिपाने और घटना के बाद लोगों को गुमराह करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। अदालत के सामने अब सवाल सिर्फ यह नहीं था कि सौरभ की हत्या किसने की, बल्कि यह भी था कि उपलब्ध साक्ष्य अपराध की गंभीरता और दोषियों की भूमिका को किस हद तक साबित करते हैं।
अदालत में दोनों से पूछा गया – कुछ कहना चाहते हो ?
सजा सुनाने से पहले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने जेल में बंद मुस्कान और साहिल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनका पक्ष जाना। अदालत ने दोनों से उनके नाम, शिक्षा और परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी लेने के बाद सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी होने पर उनकी प्रतिक्रिया पूछी।
मुस्कान ने अपनी छोटी बेटियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए। इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल सवाल सुनने के बाद सिर झुकाए चुपचाप खड़ा रहा और उसने कोई जवाब नहीं दिया।
अभियोजन पक्ष ने दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। दूसरी ओर, बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन ने मुस्कान की दो बेटियों और उसके बुजुर्ग माता-पिता का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की दलील रखी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को मेरठ में की गई थी। सौरभ के लंदन से लौटने के बाद उसकी पत्नी मुस्कान और साहिल पर मिलकर हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने का आरोप था। पुलिस की जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, सौरभ को पहले नशीला पदार्थ दिया गया और फिर उस पर चाकू से हमला किया गया।
आरोप है कि हत्या के बाद शव को बाथरूम में ले जाकर उसके टुकड़े किए गए। शव के हिस्सों को नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखा गया और सीमेंट का घोल भरकर छिपाने की कोशिश की गई। इस अमानवीय तरीके से शव को ठिकाने लगाने की कोशिश ने मामले को और गंभीर बना दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद मुस्कान शिमला-मनाली घूमने चली गई थी। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए, ताकि लोगों को लगे कि सब कुछ सामान्य है और वह सौरभ के साथ घूम रही है।
18 मार्च 2025 को सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा। वहां उसने मुस्कान को साहिल के साथ देखा। जब उसने सौरभ के बारे में पूछा तो मुस्कान कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। इसी दौरान घर से आ रही दुर्गंध ने संदेह को और गहरा कर दिया। आसपास के लोग जुटे और पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने जांच शुरू की तो नीले ड्रम में छिपाए गए शव के अवशेष बरामद हुए। इसके बाद मामला हत्या के रूप में सामने आया और जांच का दायरा मुस्कान तथा साहिल तक पहुंचा। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाए।
जुलाई 2025 में जिला अदालत में मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, कॉल डिटेल, बरामदगी और अन्य साक्ष्य पेश किए। 30 सितंबर को अदालत ने मुस्कान और साहिल को सौरभ की हत्या का दोषी करार दिया। इसके बाद सजा के सवाल पर दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई तरह के साक्ष्य रखे। इनमें चश्मदीद गवाह, हथियारों की बरामदगी, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पर बातचीत और होटल के सीसीटीवी फुटेज शामिल थे। अभियोजन के अनुसार, इन साक्ष्यों ने घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
अहम सबूत ….
चश्मदीद का बयान – गवाह ने कथित तौर पर हत्या वाली रात साहिल को सौरभ के घर जाते देखा था।
हथियारों की बरामदगी – मुस्कान और साहिल की निशानदेही पर चाकू और उस्तरा बरामद किए जाने की बात सामने आई।
फॉरेंसिक साक्ष्य – बरामद हथियारों पर मानव रक्त मिलने की बात अभियोजन पक्ष ने रखी।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड – मुस्कान और साहिल के बीच संपर्क की जानकारी जांच का हिस्सा बनी।
सोशल मीडिया चैट – दोनों के बीच हुई बातचीत को भी साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया।
दोस्त की गवाही – सौरभ के दोस्त संजीव पाल के बयान और कॉल रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया।
परिजनों के कॉल रिकॉर्ड – सौरभ की मां रेनू की कॉल डिटेल भी जांच में शामिल रही।
होटलों के फुटेज – जिन होटलों में मुस्कान और साहिल के ठहरने की जानकारी मिली, वहां के सीसीटीवी फुटेज और प्रबंधकों के बयान पेश किए गए।
22 गवाहों की गवाही – मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 22 गवाहों के बयान कराए।
इन साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखकर अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने की कोशिश की। अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया और बाद में मृत्युदंड सुनाया।
नीले ड्रम के भीतर क्या मिला था? गवाहों ने अदालत में बताया
मामले की सुनवाई के दौरान ड्रम खोलने वाले व्यक्ति, पंचनामा तैयार करने वाले पुलिस अधिकारी और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर के बयान भी महत्वपूर्ण रहे।
ड्रम काटने वाले अशोक ने अदालत को बताया कि ब्रह्मपुरी थाना पुलिस उन्हें मेडिकल अस्पताल की मोर्चरी लेकर गई थी, जहां नीला ड्रम रखा था। ड्रम का ढक्कन नहीं खुलने पर उन्होंने उसे काटना शुरू किया। उनके बयान के मुताबिक, ड्रम के भीतर सीमेंट में दबे शव के अवशेष और अन्य सामग्री मिली थी। उन्होंने चाकू और उस्तरा मिलने की बात भी कही।
पंचनामा तैयार करने वाले दरोगा धर्मेंद्र गौड़ ने बताया कि प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट से जमी एक युवक की लाश मिली थी। उनके अनुसार, शव के तीन हिस्से दिखाई दिए और लंबे समय तक सीमेंट में दबे रहने के कारण शरीर का रंग कई जगह सफेद पड़ गया था।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने भी शरीर पर चोटों और कटे हुए अंगों का उल्लेख किया। डॉक्टर के बयान के अनुसार, शरीर पर चाकू से वार के निशान थे और जांच में नशीले पदार्थ के सेवन से जुड़ी जानकारी सामने आई थी। इन बयानों ने शव की बरामदगी और हत्या के बाद की स्थिति को अदालत के सामने स्पष्ट करने में मदद की।
मुस्कान के माता-पिता ने भी लिखकर जताई नाराजगी
इस मामले में एक और सामने आया, जब मुस्कान के माता-पिता ने अदालत को पत्र सौंपा। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने लिखा कि मुस्कान को जो भी सजा मिले, उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है और वे उससे कभी नहीं मिलेंगे। उन्होंने उसकी छोटी बेटी से भी कोई संबंध नहीं रखने की बात कही।
सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत का फैसला एक लंबे मुकदमे के बाद आया है। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य, तकनीकी और मौखिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष ने कम सजा देने की मांग की। अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड सुनाया है।







