Form-6 में किसने बदलाव किया ? सुप्रीम कोर्ट ने कहा_ हमने मंजूरी नहीं दी

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मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने Form-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि आयोग का रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि Form-6 में बदलाव किसने और किस आधार पर किया।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने ऐसे किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी थी. CJI सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि आयोग का रिकॉर्ड आने पर यह देखा जाएगा कि Form-6 में बदलाव किसने किया था।

केंद्रीय चुनाव आयोग के एक दावे को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दे दिया. आयोग ने कहा था कि जिन जगहों पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन चल रहे हैं, वहां पर फॉर्म-6 में बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी. लेकिन 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इससे साफ इनकार कर दिया।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने साफ-साफ कहा कि फॉर्म-6 में किसी भी बदलाव को उन्होंने मंजूरी नहीं दी है. कोर्ट ने ये भी संकेत दिया कि बाद में वो इसकी जांच भी करेगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किए थे।

फॉर्म-6 ‘Registration of Electors Rules, 1960’ के तहत चुनाव आयोग की ओर से जारी एक अहम दस्तावेज है. इसके जरिए नए वोटर्स मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं. नियम ये है कि चुनाव आयोग खुद इस फॉर्म में कुछ बदलाव नहीं कर सकता. इसमें बदलाव के लिए केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ता है. लेकिन जुलाई 2026 में चुनाव आयोग ने बिना सरकारी नोटिफिकेशन के ECINet ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया. इसमें एक नया कॉलम जोड़ा गया, जिसमें आवेदक से उसके माता-पिता के बारे में पूछा जा रहा था कि पिछले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के समय उनका स्टेटस क्या था।

चुनाव आयुक्तों ने जताई आपत्ति

13 अगस्त 2026 को चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव को ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ बताया था. उन्होंने कहा था कि इसकी वजह से पहली बार वोट देने वाले युवाओं को बेवजह परेशान किया जा रहा है. उन्होंने इसे तुरंत हटाने के लिए कहा, लेकिन बदला हुआ फॉर्म पोर्टल पर मौजूद रहा. अंग्रेजी अखबार ‘ द इंडियन एक्सप्रेस
’ ने 26 सितंबर को इस पर रिपोर्ट पब्लिश की थी, जिसके बाद ये मामला चर्चा में आया. विपक्षी दलों ने इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरना शुरू कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

यह बात बिल्कुल साफ है कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी बदलाव को हमने मंजूरी नहीं दी है. जब (चुनाव आयोग की) रिपोर्ट हमारे सामने आएगी, तो हम यह देखना चाहेंगे कि किसने क्या बदलाव किया है ?

बता दें कि चुनाव आयोग ने बाद में उन राज्यों में अपने ECINET पोर्टल से बदले हुए फॉर्म-6 को हटा दिया, जहां SIR पूरा हो चुका है. चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा कि SIR खत्म होने के बाद आम दिनों में पुराना फॉर्म ही इस्तेमाल किया जाएगा, जो Registration of Electors Rules, 1960 कानून के तहत तय है।

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