उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने देहरादून नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 98 के पार्षद प्रशांत खरोला को चुनावी याचिका में नोटिस जारी कर मंगाया जिला कोर्ट देहरादून का पूरा रिकॉर्ड।
देहरादून नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 98, बालावाला के चयनित प्रत्याशी प्रशांत खरोला के खिलाफ उनके प्रतिद्वंदी आशीष खत्री ने चुनावी अपील दाखिल की है। खत्री चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे और वह महज 26 वोटों से परिजित हुए। उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए प्रतिनिधि प्रशांत खरोला को नोटिस जारी कर दिया है और चुनाव याचिका का पूरा रिकॉर्ड देहरादून जिला न्यायालय से उत्तराखंड उच्च न्यायालय मंगाने के निर्देश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार, आशीष खत्री ने प्रशांत खरोला के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी थी कि चुनाव लड़ते समय प्रशांत खरोला ने जो शपथपत्र दाखिल किया वह झूठा है। उसमें तिथियों की विभिन्नता है और उसमें प्रशांत खरोला ने अपना आपराधिक रिकॉर्ड भी छुपाया है। उन्होंने यह नहीं बताया कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा लंबित है, जबकि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 45 (ऊत्तराखण्ड में 2002 में संशोधित) के तहत अपने ऊपर न केवल लंबित आपराधिक मुकदमे बल्कि वो आपराधिक मुकदमे जो समाप्त भी हो चुके हैं, उनका भी हर प्रत्याशी को घोषित करना होता है।
बता दें कि आशीष खत्री की देहरादून जिला न्यायालय ने चुनाव याचिका को इस वजह से निरस्त कर दिया कि भले ही प्रशांत खरोला ने अपने आपराधिक मुकदमे छुपाए हों, तब भी इससे यह नहीं साबित हुआ कि चुनाव नतीजे प्रभावित हुए। कुछ अन्य तकनीकी कारणों से भी जिला जज ने आशीष खत्री की चुनाव याचिका को निरस्त कर दिया था।PrashantKharola #ElectionPetition
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