उत्तराखंड:चार कांवड़ियों की दर्दनाक मौत, एक-दूसरे को बचाने में गई चारों की जान..

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हरिद्वार। कांवड़ यात्रा के दूसरे दिन हरिद्वार से एक बेहद दुखद खबर सामने आई। ज्वालापुर के जटवाड़ा पुल के पास गंगनहर में डूबने से चंडीगढ़ के चार कांवड़ियों की मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि एक साथी को बचाने के लिए बाकी तीन युवक भी पानी में उतर गए और तेज बहाव की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठे।

जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ से करीब 20 कांवड़ियों का दल गंगाजल लेने हरिद्वार आया था। सभी श्रद्धालु हरकी पैड़ी से गंगाजल भरकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान दोपहर करीब 3:30 बजे जटवाड़ा पुल के पास कुछ युवक रुक गए। उनमें से एक किशोर गंगनहर में नहाने उतरा, लेकिन कुछ ही देर में वह गहरे पानी और तेज बहाव में फंसकर डूबने लगा।

अपने साथी को संकट में देख तीन अन्य युवक भी उसे बचाने के लिए नहर में कूद गए। लेकिन तेज बहाव और नीचे मौजूद दलदली मिट्टी के कारण चारों बाहर नहीं निकल सके और देखते ही देखते पानी में समा गए।

घटना की सूचना मिलते ही जल पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। गोताखोरों ने काफी देर तक सर्च ऑपरेशन चलाया और चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

मृतकों की पहचान शिवांशु (16), नीतीश, भरत और रोहित के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार चारों नाबालिग थे। हादसे के बाद उनके साथ आए अन्य कांवड़ियों और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

जिला अस्पताल पहुंचे कांवड़िया साहिल ने बताया कि उसने एक साथी को किसी तरह बचा लिया, लेकिन अपने भाई समेत चार युवकों को नहीं बचा सका। इस हादसे ने पूरे दल को गहरे सदमे में डाल दिया।

पुलिस के मुताबिक, जहां यह हादसा हुआ वहां न तो अधिकृत स्नान घाट है और न ही वहां नहाने की अनुमति है। लोगों को सावधान करने के लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद युवक नहर में उतर गए। अधिकारियों का कहना है कि उस हिस्से में तेज बहाव के साथ नीचे दलदली मिट्टी होने के कारण हादसे का खतरा हमेशा बना रहता है।

एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि गंगा और गंगनहर में केवल प्रशासन द्वारा अधिकृत और सुरक्षित घोषित घाटों पर ही स्नान करें। चेतावनी वाले स्थानों और प्रतिबंधित क्षेत्रों में पानी में उतरने से बचें तथा पुलिस और प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

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