उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में प्रतापनगर विधायक ने टिहरी बांध परियोजना से संबंधित जनहित याचिका दायर की। न्यायालय ने सरकार से जवाब तलब किया।
मामले के अनुसार, टिहरी गढ़वाल जिले में प्रतापनगर क्षेत्र के विधायक विक्रम सिंह नेगी ने न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर टिहरी बांध परियोजना की मंजूरी से जुड़ी एक अहम शर्त के उल्लंघन मामले को उठाया।गौरतलब है कि वर्ष 1990 के दौरान ही जब टिहरी बांध परियोजना को मंजूरी मिल रही थी, तब यह अनिवार्य शर्त भारत सरकार द्वारा रखी गई थी कि ‘भागीरथी रिवर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ का गठन किया जाएगा, जिसको राज्य सरकार के स्तर पर धन उपलब्ध कराया जाएगा और जो समय-समय पर बांध परियोजना से हुए प्राकृतिक, भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक दृष्टिकोण से गतिविधियों का निरीक्षण करती रहेगी। यही नहीं, वर्ष 2005 में उत्तराखंड सरकार द्वारा एक विशेष अधिनियम भी विधानसभा में पारित किया गया, जिसमें धारा 12 में स्पष्ट प्रावधान था कि ‘भागीरथी रिवर वैली अथॉरिटी’ को फंड सरकार से मुहैया कराया जाएगा। राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी ‘भागीरथी रिवर वैली अथॉरिटी’ को सरकार की तरफ से कोई फंड नहीं उपलब्ध कराया गया है, जिससे कि इसकी असल कार्यप्रणाली पूरी तरह बाधित है। गौरतलब है कि वर्ष1990 में दी गई भारत सरकार की अनुमति में यह भी प्रावधान था कि अगर पर्यावरणीय और अन्य दृष्टिकोण से इसकी किसी भी शर्त का उल्लंघन किया गया, तो बांध पर भी काम रोका जा सकता है।
विधायक विक्रम सिंह नेगी ने इस बिंदु को पूर्व में विधानसभा के पटल पर भी उठाया था और इस पर सवाल पूछा था। ऊर्जा का पोर्टफोलियो संभाल रहे मुख्यमंत्री धामी ने इस पर गोलमोल जवाब दिया था और यह स्पष्ट नहीं बताया कि अथॉरिटी को फंड क्यों नहीं मुहैया कराया जा रहा है।
आज न्यायालय ने पी.आई.एल.में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी को सुनने के बाद सरकारी अधिवक्ता से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद के लिए तय हुई है। अभिजय ने बताया कि अधिनियम के अनुसार, टिहरी डैम के राजस्व का 20प्रतिशत रुपया ‘भागीरथी रिवर वैली अथॉरिटी’ के सुधार के लिए खर्च किया जाएगा, लेकिन अबतक शून्य प्रतिशत धन दिया गया है।
बांध की मंजूरी की शर्तों के उल्लंघन का मामला पहुँचा हाईकोर्ट




