‘पिरुल गर्ल ऑफ नैनीताल’वनाग्नि की वजह को बना दिया रोजगार का जरियाये कहानी अलग है..

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रामगढ़ (नैनीताल) – जहां एक ओर जंगलों में लगने वाली आग के लिए चीड़ की सूखी पत्तियां (पिरुल) बड़ी वजह मानी जाती हैं, वहीं रामगढ़ ब्लॉक के ध्वेती गांव की बेटी भारती जीना ने इसी पिरुल को रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बना दिया है। अपनी लगन, मेहनत और नवाचार के बल पर आज वह पूरे क्षेत्र में “पिरुल गर्ल ऑफ नैनीताल” के नाम से पहचान बना चुकी हैं।

पहाड़ी आर्मी संगठन की महिला मोर्चा नगर अध्यक्ष कविता जीना ने बताया कि भारती वर्तमान में एमबीपीजी कॉलेज में बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। पांच बहनों में सबसे छोटी भारती के पिता खेती-किसानी से जुड़े हैं, जबकि उनकी माता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

भारती बताती हैं कि बचपन से ही वह अपने दादा जी को पिरुल से विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद बनाते हुए देखती थीं। दादा जी से मिली प्रेरणा ने उन्हें कम उम्र में ही इस कला को सीखने के लिए प्रेरित किया। आज वही बचपन का शौक उनकी पहचान और सफलता का आधार बन चुका है।

स्कूल के शिक्षकों के प्रोत्साहन और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग से भारती के उत्पादों को व्यापक पहचान मिली। उनके द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प उत्पादों की सराहना कुमाऊं आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है।

भारती केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में स्वयंसेवी संगठन से जुड़ी महिलाओं सहित 24 अन्य महिलाएं उनके साथ कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं जंगलों से पिरुल एकत्रित कर उससे टोकरी, सजावटी सामग्री और विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करती हैं। इस पहल से समूह को प्रतिमाह लगभग 20 से 25 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।

इसके साथ ही भारती विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल भी बन रही है।

पहाड़ी आर्मी की महिला मोर्चा नगर अध्यक्ष कविता जीना ने कहा कि उन्हें ऐसी प्रतिभाशाली बेटी पर गर्व है, जो न केवल समाज बल्कि पूरे उत्तराखंड में अपनी मेहनत और प्रतिभा से नाम रोशन कर रही है। उन्होंने कहा कि भारती महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का सराहनीय कार्य कर रही हैं और भविष्य में यदि उन्हें किसी भी प्रकार की आवश्यकता होगी तो पहाड़ी आर्मी हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी।

भारती जीना की यह सफलता साबित करती है कि यदि दृढ़ संकल्प और मेहनत हो तो जंगल की सूखी पत्तियां भी किसी के सपनों को नई उड़ान दे सकती हैं।

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