रामनगर (नैनीताल)। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने शनिवार सुबह बड़ा अभियान चलाया। नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी किनारे स्थित पूछड़ी बस्ती में वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने बुलडोजर चलाकर 86 पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान करीब 14 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया।
सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुए इस अभियान के दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। अपने वर्षों पुराने आशियानों को टूटते देख कई परिवारों में चीख-पुकार मच गई। महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आए। स्थानीय स्तर पर कई लोगों के बेहोश होने और एक महिला को हार्ट अटैक आने की सूचना भी सामने आई है। प्रभावित लोगों को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
भू-माफिया पर जमीन बेचकर बस्ती बसाने का आरोप
प्रशासन के अनुसार, कोसी नदी किनारे तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र की सरकारी वन भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण था। आरोप है कि भू-माफिया ताहिर मुल्ला ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर बाहर से आए लोगों को प्लॉट बेचकर यहां बस्ती बसाई थी। वन विभाग की ओर से ताहिर मुल्ला के खिलाफ पुलिस और विभागीय स्तर पर मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
इस मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
कार्रवाई से पहले रात में ही मकान खाली करने लगे लोग
अतिक्रमण हटाने से पहले जिला प्रशासन की ओर से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के साथ मुनादी भी कराई गई थी। शुक्रवार शाम पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों को अभियान के संबंध में ब्रीफिंग दी गई। इसके बाद देर रात से ही कई परिवारों ने अपने मकान खुद तोड़ने शुरू कर दिए। लोग ईंट, दरवाजे और अन्य निर्माण सामग्री निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखाई दिए।
शनिवार सुबह वन विभाग और प्रशासन की टीमें जेसीबी और बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचीं और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई जमीन वन विभाग को सौंप दी जाएगी।
सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन का भारी इंतजाम
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर पूरे क्षेत्र को 2 सुपर जोन, 7 जोन, 14 सेक्टर और 6 बैरियर में बांटा गया था। अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए 5 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 5 एएसपी, 6 सीओ, 25 इंस्पेक्टर और 82 दरोगा तैनात किए गए। इसके अलावा तीन कंपनी पीएसी और फायर सर्विस की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
एसएसपी ने भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए जाने की जानकारी दी।
वर्षों तक कैसे बसी बस्ती, जिम्मेदारों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
सरकारी वन भूमि पर वर्षों तक कब्जा और फिर वहां पक्के मकानों का निर्माण होना वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि भू-माफिया ने सरकारी जमीन बेचकर लोगों को बसाया तो यह भी जांच का विषय है कि इतने लंबे समय तक जिम्मेदार विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अतिक्रमण हटाना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और खरीद-फरोख्त के लिए जिम्मेदार लोगों तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होना जरूरी है।







