हल्द्वानी। ईद-मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर बुधवार को हल्द्वानी में जुलूस-ए-मोहम्मदी पूरे अदब, एहतराम और अकीदत के साथ निकाला गया। बनभूलपुरा से शुरू हुए इस जुलूस में बड़ी तादाद में अकीदतमंद शरीक हुए। बच्चों की मासूमियत, नौजवानों का जोश और बुजुर्गों की अकीदत ने पूरे माहौल को रूहानी और खुशनुमा बना दिया।
जुलूस के दौरान जगह-जगह लोगों ने अकीदतमंदों का इस्तकबाल किया। कहीं लंगर का इंतजाम था तो कहीं फल और खाने-पीने की चीजें तकसीम की गईं। कई जगहों पर जुलूस पर फूल बरसाकर खैरमकदम किया गया। इस दौरान हिंदू और सिख समाज के लोगों ने भी जुलूस का इस्तकबाल कर मोहब्बत, भाईचारे और कौमी एकता का खूबसूरत पैगाम दिया।
मुजाहिद चौक से हुआ जुलूस का आगाज
जुलूस-ए-मोहम्मदी का आगाज सुबह करीब 8:30 बजे लाइन नंबर-17 स्थित मुजाहिद चौक से हुआ। मुस्लिम एक्शन कमेटी के कन्वीनर इंतजार हुसैन साहन ने फीता काटकर जुलूस को रवाना किया।
मुजाहिद चौक से निकला जुलूस निर्धारित रूट के मुताबिक इंद्रानगर, नई बस्ती, क्षेत्र होते हुए चोरगलिया रोड, गफूर बस्ती, रेलवे बाजार और भोटिया पड़ाव से होकर वापस मुजाहिद चौक पहुंचा, जहां जुलूस का पुरअमन तरीके से समापन हुआ।
जुलूस के पूरे रास्ते अकीदतमंदों की खिदमत के लिए लोगों ने लंगर, सबील और फल वितरण का इंतजाम किया। कई जगह जुलूस का फूलों से इस्तकबाल किया गया। यह नजारा हल्द्वानी की तहजीब और आपसी मोहब्बत की खूबसूरत तस्वीर पेश करता नजर आया।
उलेमा ने दिया भाईचारे और कौमी एकता का पैगाम
जुलूस के दौरान शहर काजी मुफ्ती आजम रजा कादरी समेत मस्जिद गफ्फारी,नूरी साबरी मस्जिद, भरताना मस्जिद, बिलाल-ए-मस्जिद समेत विभिन्न मसाजिद के उलेमा ने तकरीर के जरिए लोगों को भाईचारे, कौमी एकता, अमन और आपसी मोहब्बत का पैगाम दिया।
उलेमा ने शिक्षा की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की बेहतर तालीम और अच्छी परवरिश समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। खास तौर पर बेटियों की अच्छी परवरिश और तालीम को लेकर भी लोगों को नसीहत की गई। जुलूस के जरिए समाज में अमन, इंसानियत और एक-दूसरे का एहतराम करने का पैगाम देने पर जोर रहा।
जुलूस का आयोजन मुस्लिम एक्शन कमेटी की निगरानी में किया गया। इसमें दावत-ए-इस्लामी, मदरसा इशातुल हक, मदरसा चिराग अली शाह बाबा, मदरसा तालीमुल इस्लाम, रजा-ए-हकतीब समेत कई तंजीमों और मदरसों ने शिरकत की।
जुलूस की तंजीम और व्यवस्थाओं में फैजान-ए-संचालन की जिम्मेदारी शाहनवाज सैफी ने संभाली। वहीं जमीर अहमद, शराफत खान, हसरत खान, खतीब बराम साबरी, शमशाद हुसैन, मीत शाहरुख, अख्तर अली और दानिश इंतजार समेत तमाम अराकीन ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
वालंटियर्स ने पूरे रास्ते जुलूस की तरतीब बनाए रखने, अकीदतमंदों की खिदमत और यातायात व्यवस्था में सहयोग किया।
शहर काजी ने दिया मुल्क और कौमी एकता का पैगाम
जुलूस के इख्तिताम के मौके पर शहर काजी ने मुल्क की तरक्की, अमन और कौमी एकता की दुआ और पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि समाज की तरक्की आपसी मोहब्बत, भाईचारे और एक-दूसरे के एहतराम से ही मुमकिन है।
जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के लिए जगह-जगह लंगर का इंतजाम किया गया। लोगों ने अपनी हैसियत के मुताबिक खिदमत कर जुलूस में शामिल लोगों का इस्तकबाल किया। फूल बरसाए गए और फल तकसीम किए गए, जिससे जुलूस में शामिल लोगों के बीच अपनापन और मोहब्बत का एहसास नजर आया।
प्रशासन की तैयारियां भी रहीं मुकम्मल
जुलूस को लेकर प्रशासन और कोतवाली बनभूलपुरा पुलिस की ओर से पहले ही रूट का सर्वे कर तमाम इंतजाम मुकम्मल कर लिए गए थे। रास्ते में जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई और यातायात को जरूरत के मुताबिक डायवर्ट किया गया।
प्रशासन की ओर से जुलूस के मद्देनजर सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत और रूट की तैयारियों पर भी काम किया गया। पुलिस बल पूरे रूट पर मुस्तैद रहा और जुलूस के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखी गई।
जुलूस-ए-मोहम्मदी पूरे अदब और एहतराम के साथ अपने तयशुदा रास्ते से गुजरता हुआ वापस मुजाहिद चौक पहुंचा और पुरअमन माहौल में समापन हुआ।
जुलूस की कामयाबी के बाद अराकीन-ए-कमेटी ने जुलूस में शामिल होने वाले तमाम लोगों, वालंटियर्स, स्थानीय लोगों और प्रशासन का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा किया।





