ज्योलिकोट में तीन मौत_ हाई कोर्ट ने कहा जीवन पर संकट बर्दाश्त नही.. पूरा प्रशासन तलब

खबर शेयर करें -

Nainitallive

उत्तराखण्ड में नैनीताल के गांवों में दूषित पानी पीने से मौतों पर उच्च न्यायालय हुआ सख्त:। डी.एम., सी.एम.ओ. सहित आला अधिकारियों को किया तलब। जल संस्थान को स्वच्छ पेयजल और संदूषण-मुक्त पेयजल आपूर्ति करने को कहा।

   नैनीताल से दिल्ली मार्ग में 17 किलोमीटर पर पड़ने वाले ज्योलीकोट समेत उसके आसपास के गांव जैसे, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल आदि में दूषित पेयजल के कारण फैली जल जनित बीमारियों का उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेहद गंभीर संज्ञान लिया है। पिछले तीन महीनों से क्षेत्र में डायरिया और पीलिया जैसी बीमारियां फैलने, तीन लोगों की मौत होने और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने के मामले को लेकर बेलुवाखान निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट ने जनहित याचिका दायर की। 

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता का मुद्दा उठाया गया और प्रभावितों के नि:शुल्क इलाज व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की गई।

  ​मामले की अलार्मिंग स्थिति को देखते हुए खंडपीठ ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी(सी.एम.ओ.), उत्तराखंड जल संस्थान के महाप्रबन्धक और उत्तराखंड पेयजल निगम(कुमाऊं मंडल)के मुख्य अभियंता को 8 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है। अदालत ने इन अधिकारियों को जल जनित बीमारियों के प्रकोप से निपटने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पूरी कार्ययोजना (रोडमैप)और ब्यौरे के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

​खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को आदेश दिया है कि वो प्रभावित गांवों के रहने वालों को तत्काल प्रभाव से स्वच्छ और संदूषण-मुक्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करें। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि दूषित जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण लोगों के जीवन पर संकट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जिसके चलते प्रशासनिक व विभागीय आला अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा रही है।

NainitalHighCourt #ContaminatedWater

PublicHealth #JusticeForVictims

AccountabilityMatters

ADVERTISEMENTSAd Ad
Breaking News