हल्द्वानी हादसे में तीसरे दोस्त की भी थम गई सांसें, तीन परिवारों के सपने उजड़ गए..

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हल्द्वानी। तीनपानी फ्लाईओवर पर शुक्रवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं। तेज रफ्तार कार के पलटकर डिवाइडर से टकराने के बाद घायल तीसरे नाबालिग ने भी शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे में पहले ही दो किशोरों की मौत हो चुकी थी। वहीं, कार में सवार चौथी दोस्त का अस्पताल में इलाज चल रहा है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

हादसे में उत्कर्ष धपोला (16), प्रांजय (17) और सिद्धांत पाठक (16) की जान चली गई। चारों दोस्त थे और साथ में कोचिंग की पढ़ाई कर रहे थे। उनकी उम्र सपनों को संजोने और भविष्य बनाने की थी, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों से उनके लाडले छीन लिए।

मां से कहकर निकला था, दोस्त से मिलकर आता हूं… सिद्धांत पाठक शुक्रवार को अपनी मां पुष्पलता पाठक से यह कहकर घर से निकला था कि वह अपने दोस्त उत्कर्ष धपोला से मिलने जा रहा है।

चारों दोस्त आपस में बेहद करीब थे। साथ पढ़ते थे और भविष्य में जेईई (JEE) की परीक्षा पास कर इंजीनियर बनने का सपना देखते थे। उनकी आंखों में सुनहरे भविष्य की उम्मीदें थीं और परिवारों ने भी बच्चों के लिए कई सपने संजो रखे थे। अब उन्हीं घरों में खुशियों की जगह मातम पसरा है।

पिता ने बेटे के लिए खरीदी थी नई कार

उत्कर्ष धपोला के पिता शैलेंद्र ने हाल ही में नई कार खरीदी थी। परिवार करीब एक साल पहले बागेश्वर से हल्द्वानी के ऊंचापुल क्षेत्र में आकर रहने लगा था। बेटे के बेहतर भविष्य को लेकर परिवार ने कई उम्मीदें पाल रखी थीं, लेकिन इस हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

प्रांजय के पिता भीमताल में प्रोफेसर हैं, जबकि उनका बड़ा भाई भारतीय वायुसेना में देश की सेवा कर रहा है। सिद्धांत के परिवार के लिए भी यह क्षति अपूरणीय है। तीनों किशोरों की मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

कैसे हुआ भीषण हादसा?

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार 23 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:25 बजे फोर्ड फिगो कार तीनपानी फ्लाईओवर के पास अनियंत्रित होकर पलट गई और डिवाइडर से जा टकराई। कार गोलापुल की ओर से लालकुआं की तरफ जा रही थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसे में चारों दोस्त बेहद तरह से घायल हो गए। दो किशोरों ने शुक्रवार को ही दम तोड़ दिया, जबकि तीसरे साथी की शनिवार को इलाज के दौरान सांसें थम गईं।। चौथी किशोरी अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही है।

इस बेहद अफसोसनाक हादसे में तीन परिवारों के चिराग बुझ गए और इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले तीन दोस्तों की जिंदगी बीच रास्ते में ही थम गई।

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