कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक IFS साकेत बडोला ने इस्तीफा दिया,11 साल पहले VRS_वन विभाग में हलचल

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उत्तराखंड वन विभाग से बड़ी खबर सामने आई है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और IFS अधिकारी डॉ. साकेत बडोला ने भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद वन विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने इस्तीफे या VRS के पीछे किसी विभागीय कारण का जिक्र नहीं किया है।

वर्ष 2008 बैच के IFS अधिकारी साकेत बडोला मूल रूप से पौड़ी जिले के कोटद्वार के रहने वाले हैं। वन सेवा में आने से पहले वह पशु चिकित्सक थे। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने तराई पश्चिमी वन प्रभाग, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए गठित ट्रैफिकिंग सेल के प्रमुख भी रहे।

राजाजी टाइगर रिजर्व में निदेशक की जिम्मेदारी संभालने के बाद जुलाई 2024 में उनका तबादला कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर हुआ था। पिछले वर्ष उन्हें मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी। उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में होनी थी, लेकिन अब उन्होंने करीब 11 साल पहले ही सेवा छोड़ने का फैसला किया है।

सोशल मीडिया पर बताई फैसले की वजह

साकेत बडोला ने अपनी पोस्ट में बताया कि कई महीनों तक गंभीर विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से VRS लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि पौड़ी जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवा में शामिल होना उनके लिए सपने के सच होने जैसा था।

उन्होंने अपने सेवाकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है और भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण में हरसंभव योगदान देने की उम्मीद जताई है।

पिछले दो वर्षों में VRS मांगने वाले वह उत्तराखंड वन विभाग के तीसरे IFS अधिकारी बताए जा रहे हैं। इससे पहले वन विभाग के मुखिया रह चुके एक अधिकारी भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं। लगातार वरिष्ठ अधिकारियों के VRS मांगने से वन विभाग में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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