उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) के बहुचर्चित पेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। पुलिस ने शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ एक पेपर नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से यूनिवर्सिटी के प्रश्नपत्र तैयार करता रहा था। अब जांच एजेंसियों को आशंका है कि **2010 से अब तक आयोजित कई परीक्षाओं में भी पेपर लीक की कड़ियां जुड़ी हो सकती हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले का खुलासा यूनिवर्सिटी की किसी आंतरिक व्यवस्था से नहीं, बल्कि एक गुमनाम ई-मेल से हुआ।
8 जुलाई 2026 को Machine Learning for Internet of Things’ की परीक्षा खत्म होने के बाद यूनिवर्सिटी को एक ई-मेल मिला। इसमें आरोप लगाया गया कि 3 जुलाई की रात आरोपी प्रोफेसर ने 22 छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में “Important Questions” भेजे थे। जब यूनिवर्सिटी ने इन सवालों का मूल प्रश्नपत्र से मिलान किया, तो वे लगभग पूरी तरह मेल खा गए।
दो परीक्षाएं रद्द, हजारों छात्र प्रभावित
आंतरिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यूनिवर्सिटी ने दो परीक्षाएं रद्द कर दीं_
Machine Learning for Internet of Things (IOTT004)
Electromagnetic Field Theory (ECT043)
इन परीक्षाओं से प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं। अब दोनों परीक्षाएं अगस्त के तीसरे सप्ताह में दोबारा कराई जाएंगी।
16 साल का करियर अब जांच के दायरे में
पुलिस जांच में सामने आया कि डॉ. आशीष कुमार गुप्ता 2010 से लगातार विभिन्न संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे और कई बार यूनिवर्सिटी के प्रश्नपत्र तैयार किए।
उनका करियर इस प्रकार रहा
DIT University (2010–2013)
JBIT Institute (2013–2018)
Uttaranchal University (2018–2019)
Shivalik College of Engineering (2019–2026)
जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि क्या पहले की परीक्षाओं में भी इसी तरह पेपर लीक हुए थे।
कॉलेज ने निकाला, UTU ने लगाया 7 साल का बैन
गिरफ्तारी के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने आरोपी प्रोफेसर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
वहीं UTU प्रशासन ने आरोपी को अगले सात वर्षों तक यूनिवर्सिटी की किसी भी परीक्षा संबंधी गतिविधि से प्रतिबंधित कर दिया है। गोपनीयता में लापरवाही बरतने पर कॉलेज को भी कड़ी चेतावनी जारी की गई है।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
देहरादून के प्रेमनगर थाने में UTU के परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं
धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात)
धारा 318(4) (धोखाधड़ी)
धारा 61(2) (आपराधिक साजिश)
के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप, ई-मेल और व्हाट्सएप चैट की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
सरकार का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने साफ कहा है कि परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक प्रोफेसर का मामला है, या फिर पेपर लीक का नेटवर्क वर्षों से सक्रिय था? इसका जवाब अब पुलिस और फॉरेंसिक जांच से सामने आएगा।




