उत्तराखण्ड की नैनीझील को सुधारने के लिए डाली गई ग्रास कार्प और गोल्डन महाशीर मछलियों का रात के अंधेरे में हो रहा है अवैध शिकार। कुछ युवाओं ने मछली चोरों को पकड़कर मछलियां वापस झील में डलवाई।
नैनीताल की विश्व प्रसिद्ध नैनीझील की वर्ष 2008 में कमजोर पड़ती पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने के लिए प्रशासन ने इसे एरिएशन प्रोजेक्ट का उपहार दिया। साथ में पंतनगर के मत्स्य विभाग की तरफ से लगभग डेढ़ लाख गोल्डन महाशीर, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प समेत कुछ अन्य मछलियों के बीज डाले गए। इन मछलियों को डालने का उद्देश्य झील में पल रही अवांछित काई, पौधे व जलीय जीव जंतु को खत्म करना और झील की स्वच्छता दर्शाना था। मत्स्य विभाग समय समय पर उम्र पूरा कर चुकी मछलियों को निकालकर यहां नए बीज डालता रहता है।
वर्षों पहले नैनीझील में मत्स्य आखेट(एंगलिंग)और मछली मारने(फिशिंग)की अनुमाती दी जाती थी। समय के साथ ये अनुमाती मिली बन्द हो गई। अब कुछ लोग अवैध रूप से मछली मारकर उसे बेचने या अपना भोजन बनाने के काम में ला रहे हैं। मछली मारने पर रोक की जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर पालिका और पुलिस की है।
मंगलवार रात मल्लीताल बोट क्लब स्थित बोट स्टैंड में कुछ स्थानीय युवा घूम रहे थे। तभी उन्होंने दो लोगों को झील से मछलियां पकड़ते देखा। उन्होंने इसका वीडियो बना लिया और दोनों मछली चोरों से मछलियों को सकुशल झील में वापस डलवाया।SaveNainiLake
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