हल्द्वानी। करीब ढाई साल पुराने एक संवेदनशील मामले में हल्द्वानी की विशेष पोक्सो अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी पूरी राशि पीड़िता को दी जाएगी। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल को पीड़िता को 4 लाख रुपये का प्रतिकर (मुआवजा) उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।
विशेष पोक्सो कोर्ट (अपर सत्र न्यायाधीश) सविता चमोली की अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और पुलिस विवेचना का परीक्षण करने के बाद आरोपी सुरेश चौधरी को दोषी करार दिया।
दिसंबर 2023 में दर्ज हुआ था मामला
विशेष अभियोजन अधिकारी (पोक्सो) उपेन्द्र शर्मा के अनुसार, मामला दिसंबर 2023 का है। आरोपी सुरेश चौधरी मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मंगलपुरी क्षेत्र का निवासी है और घटना के समय हल्द्वानी में रह रहा था। पीड़िता के बयान और परिजनों की शिकायत के आधार पर थाना मुखानी में आरोपी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की गंभीर धाराओं तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच के बाद कोर्ट में पेश हुई चार्जशीट
मामले की जांच एसआई गुरविंदर कौर ने की। जांच के दौरान साक्ष्य एकत्र करने के बाद 2 मार्च 2024 को अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अभियोजन अधिकारी उपेन्द्र शर्मा और श्रीमती प्रतिभा पंत ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और विवेचना के आधार पर अदालत ने 30 जुलाई 2026 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि जुर्माने की राशि पीड़िता को मिले और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उसके पुनर्वास एवं सहायता के लिए 4 लाख रुपये का प्रतिकर उपलब्ध कराए।
यह फैसला बच्चों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों में त्वरित और प्रभावी न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे मामलों में कानून दोषियों के प्रति सख्त रुख अपनाता है और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।




