सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत, मेट्रो-रेल सेवाओं में रोक और इंटरनेट बंदी को लेकर सख्त रुख अपनाया। रविवार को विशेष सुनवाई में अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक ही कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने लोगों की आवाजाही सुचारु रखने, मेट्रो-रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलाने और इंटरनेट बहाल रखने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रोटेस्ट को लेकर उसके पिछले निर्देशों की अवमानना के आरोप (Contempt of Court) में सुनवाई हुई. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने साफ कहा कि किसी को भी कानून के तय तरीके के बिना हिरासत में ना लिया जाए. कोर्ट ने लोगों के आने-जाने, मेट्रो-रेल चलाने और इंटरनेट सेवा बहाल रखने को लेकर भी निर्देश दिए।
11 अक्टूबर को स्पेशल सुनवाई के दौरान दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में लोगों को हिरासत में लेने, मेट्रो-ट्रेन सर्विस रोकने और इंटरनेट बंद करने का मामला उठा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण और बिना हथियार प्रोटेस्ट करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक ही कार्रवाई होनी चाहिए।
कानून के मुताबिक पाबंदी लगे
कोर्ट ने ये भी कहा कि मेट्रो और रेल सर्विस पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय संविधान के आर्टिकल 19 (2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कानून के हिसाब से पाबंदी लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्देशों से जुड़ीं 10 बड़ी बातें
1.बिना वजह हिरासत में ना लें
किसी भी शख्स को कानून की तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाए. खासकर उन लोगों को परेशान ना किया जाए, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू इलाके से बाहर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हों।
2.मेट्रो और रेल नॉर्मली चलें
मेट्रो और रेल सामान्य रूप से चालू रहें. कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा होने पर ही जरूरत के मुताबिक पाबंदी लगाई जा सकती है. कोर्ट ने मेट्रो का मैप भी मांगा है, ताकि पता लगाया जा सके कि कौन से स्टेशन बंद किए, क्यों किए और इससे लोगों को कितनी परेशानी हुई।
3.इंटरनेट सेवा बंद ना हो
कोर्ट ने दिल्ली में इंटरनेट सेवा चालू रखने का निर्देश दिया. हालांकि, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने साफ किया कि इससे आईटी कानून के तहत अधिकारियों की शक्तियां खत्म नहीं होतीं।
4.लोगों की आवाजाही ना रोकें
दिल्ली में लोगों को मौजूदा कानून और ट्रैफिक नियमों के मुताबिक आने-जाने की छूट दी जाए. रास्तों पर लगाए गए बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाए।
5.सुप्रीम कोर्ट के आसपास लगे बोर्ड हटाएं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके परिसर के आस-पास लगे BNSS की धारा 163 लागू होने से जुड़े बोर्ड अब तक नहीं हटे हैं, तो उन्हें हटा दिए जाए. इससे वकीलों और आम लोगों को अदालत आने-जाने में डर या परेशानी नहीं होनी चाहिए।
6.वकीलों को काम करने से ना रोकें
वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की कि किसी भी वकील को अपने पेशे से जुड़ा काम करने से ना रोका जाए. वकील अपने मुवक्किलों से मिल सकें और पुलिस थानों में उन्हें कानूनी मदद दे सकें।
7.अनलिस्टेड पिटीशन टैग होगी
लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने ये भी कहा कि आज बताई गई दूसरी अनलिस्टेड पिटीशन को कंटेम्प्ट प्रोसिडिंग के साथ टैग किया जाएगा।
8.अधिकारियों से मांगा जवाब
कोर्ट ने कथित अवमानना के मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया. उन्हें हलफनामा दाखिल करने और पहले दिए गए निर्देशों के पालन की रिपोर्ट देने को कहा गया है।
9.मंगलवार तक रिपोर्ट दें
कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से कहा कि संबंधित पक्ष अपना जवाब और आदेश के पालन की जानकारी मंगलवार तक दें. अदालत ने मेट्रो को नॉर्मल शेड्यूल के मुताबिक चलाने की बात भी दोहराई।
10.पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल: सुनवाई के दौरान वकीलों ने प्रदर्शनकारियों को उठाने, मारपीट करने, महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी और पुलिसकर्मियों के नेम बैज ना होने की शिकायतें कीं. कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार किसी एक पक्ष को दूसरों के अधिकारों से ऊपर नहीं रखता. माने, पुलिस कानून से ऊपर नहीं है. उसे भी कानून का पालन करना होगा।







