CBSE का बड़ा बदलाव: 3rd लैंग्वेज में फेल हुए तो अटक सकती है 10th की मार्कशीट..

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नई दिल्ली | केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा (R-3) को लेकर नया असेसमेंट फ्रेमवर्क लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल स्तर पर होने वाले इंटरनल असेसमेंट में पास होना अनिवार्य होगा। यदि छात्र तीसरी भाषा में सफल नहीं होता, तो उसे कक्षा 10 का पास सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा।

CBSE के अनुसार, इस वर्ष R-3 विषय का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा। हालांकि, छात्रों को निर्धारित पासिंग क्राइटेरिया पूरा करना होगा। यदि कोई छात्र कक्षा 9 में R-3 में सफल नहीं होता है, तो उसे कक्षा 10 में प्रमोट तो कर दिया जाएगा, लेकिन 10वीं के दौरान उसे यह विषय पास करना अनिवार्य होगा।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र कक्षा 10 में भी R-3 में सफल नहीं होता, तो फाइनल रिजल्ट जारी होने से पहले उसे दोबारा असेसमेंट (Re-assessment) का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ही उसका अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा।

किन छात्रों को मिलेगी छूट?

CBSE ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD) 2016 के तहत विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। इसके अलावा, विदेशों में संचालित CBSE स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भारतीय भाषा पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। वहीं, दूसरे राज्य में स्थानांतरित होने वाले छात्र कक्षा 9 में चुनी गई भाषा को ही कक्षा 10 तक जारी रख सकेंगे।

CBSE का कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप किया गया है। इसका उद्देश्य रटने की बजाय समझ-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और छात्रों के लिए अधिक अनुकूल सीखने का माहौल तैयार करना है। बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि नए नियमों से छात्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

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