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ब्रेकिंग न्यूज़ – उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने अवमानना के आरोपी को दस दिन के भीतर आदेशों का पालन करने अन्यथा ग्यारवें दिन सजा सुनने के लिए उपस्थित होने का आदेश दिया है। एकलपीठ ने पूर्व में खंडपीठ के एक आदेश को नहीं मानने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका में चीफ इंजीनियर को नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जितेंद्र चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना(पी.एम.जी.एस.वाई.)के अंतर्गत एक टेंडर हुआ था, जिसमें याचिकाकर्ता मैसर्स जियारा पारनशिप फर्म ने भागीदारी की थी। फर्म की टेक्निकल बिड अस्वीकार हुई जिसके खिलाफ याची ने उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने शुरुवाती चरण पर स्टे लगा दिया और टैंडर रोक दिया गया। बाद में फरवरी 2026 में न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए याची को सही पाते हुए टैंडर प्रक्रिया में शामिल करने को कहा।आदेश के बावजूद विभाग ने टैंडर नहीं खोले, तो याची अवमानना याचिका लेकर एक बार फिर उच्च न्यायालय पहुंचा। अवमानना याचिका में चीफ इंजीनियर को पार्टी बनाया गया जिसके बाद अवमानना न्यायालय ने उन्हें नोटिस भेजा। याची ने न्यायालय को बताया कि उनकी सबसे कम बिड के बावजूद विभाग उन्हें टैंडर न देकर किसी और को देना चाहता है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद चीफ इंजीनियर के खिलाफ चार्जेज फ्रेम(सजा तय)किये और उन्हें दस दिन का समय देकर खंडपीठ के आदेशों का पालन करने को कहा। एकलपीठ ने ये भी कहा कि ऐसा नहीं करने पर अगली सुनवाई पर उनके खिलाफ सजा सुनाई जाएगी, जिसमें वो उपस्थित रहें। HighCourtUltimatum
ContemptOfCourt
PMGSYTenderCase





