उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के भीतर टिकट वितरण और मौजूदा विधायकों की स्थिति को लेकर एक और सर्वे अक्टूबर में, दिवाली से पहले कराए जाने की तैयारी की जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसे मौजूदा विधायकों को लेकर अंतिम आकलन माना जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट हाईकमान के साथ साझा की जाएगी।
भाजपा के चुनावी आकलन में आमतौर पर क्षेत्र में विधायक की पकड़ और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता के साथ संगठन के स्तर पर समन्वय जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाता है। इसी कड़ी में प्रस्तावित सर्वे के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर फोकस किए जाने की बात सामने आ रही है।
छह पॉइंट पर परखी जाएगी विधायकों की स्थिति
प्रस्तावित सर्वे में विधायक की क्षेत्रीय लोकप्रियता, जनता के बीच स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, कामकाज का फीडबैक, दोबारा टिकट मिलने पर चुनावी स्थिति और टिकट बदलने की स्थिति में संभावित चेहरों को शामिल किया गया है।
इस आकलन के जरिए संगठन यह समझने की कोशिश करेगा कि मौजूदा विधायक के प्रति जनता और कार्यकर्ताओं का रुझान कैसा है और टिकट को लेकर किन विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे पार्टी नेतृत्व के साथ साझा किए जाने की संभावना है।
भाजपा की रणनीति सिर्फ सिटिंग विधायकों के आकलन तक सीमित नहीं है। पार्टी उन 23 विधानसभा सीटों पर भी फोकस कर रही है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर संगठनात्मक स्थिति, स्थानीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी फीडबैक जुटाए जाने की तैयारी है।
पार्टी के लिए अक्टूबर का यह आकलन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद आगामी चुनाव को लेकर टिकट और संगठन से जुड़े फैसलों की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकती है। हालांकि अंतिम टिकट चयन पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और निर्धारित प्रक्रिया के तहत करेगा।
उत्तराखंड में चुनावी मुकाबला अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जमीनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा का यह सर्वे इसी व्यापक चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सर्वे में मौजूदा विधायकों को लेकर क्या फीडबैक सामने आता है और पार्टी हारी हुई सीटों पर किस तरह की रणनीति तैयार करती है।





