रोशनी सोसाइटी को मिला राष्ट्रीय सम्मान – मानसिक दिव्यांग बच्चों की मदद में मिसाल बनी उत्तराखंड की संस्था
लखनऊ/देहरादून।
मानसिक दिव्यांग बच्चों के अधिकारों और उनके पुनर्वास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उत्तराखंड की रोशनी सोसाइटी को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित डा. रीता पेशावरिया मेनन एवं श्रीमती प्रेमलता पेशावरिया राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार NIEPID (राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान) और परिवार महासंघ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित नेशनल पैरेंट्स मीट में दिया गया।
यह सम्मेलन 28 से 30 नवंबर तक डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ में हुआ, जिसमें देश के 25 राज्यों से आए 350 अभिभावकों और संगठनों ने भाग लिया।
कर्नाटक के राज्यपाल और वरिष्ठ गणमान्य अतिथियों ने किया सम्मानित
रोशनी सोसाइटी को यह सम्मान कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री थावर चंद गहलोत, यूपी सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज मारू, मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी, NIEPID डायरेक्टर डॉ. मेजर रामकुमार और यूपी के दिव्यांग आयुक्त डॉ. हिमांशु शेखर झा की उपस्थिति में दिया गया।
पुरस्कार में प्रशस्ति–पत्र व 21,000 रुपये की सम्मान राशि शामिल है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में यह सम्मान पाने वाली रोशनी सोसाइटी पहली संस्था है।
रोशनी सोसाइटी पर बढ़ी जिम्मेदारी
पुरस्कार समारोह में सोसाइटी की अध्यक्ष शिवानी पाल, उपाध्यक्ष हेमा परगांई, सचिव गोविंद मेहरा, सदस्य ममता धामी और विशेष बालक ओजस्विन मौजूद रहे।
अध्यक्ष शिवानी पाल ने कहा कि यह सम्मान रोशनी की जिम्मेदारी को और बढ़ाता है।
वहीं सचिव गोविंद मेहरा ने यह पुरस्कार उन सभी मानसिक दिव्यांग बच्चों को समर्पित किया “जो आज भी समाज में उपेक्षा और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।”उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में उनके अधिकारों और पुनर्वास के लिए और तेज गति से काम करेगी।
गोविंद मेहरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका
इस नेशनल पैरेंट्स मीट में गोविंद मेहरा को परिवार संस्था की राष्ट्रीय एक्ज़ीक्यूटिव काउंसिल का सदस्य भी चुना गया है। जल्द ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
