ड्रग्स का बढ़ता खतरा,हल्द्वानी में अवैध नशा मुक्ति केंद्र का काला सच_वेंटिलेटर पर शुभम..

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उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में सूखा नशा लगातार बढ़ते जा रहा है और इसके शिकार बच्चे अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में बीमार पड़ रहे हैं। पुलिस ने मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है।

  कोविड से कुछ वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में शुरू हुए स्मैक और नशीले इंजेक्शन के शिकार लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस आए दिन सूचना या मुखबिरी के बाद छोटे मोटे तस्करों को गिरफ्तार कर हल्का फुल्का नशीला पदार्थ जप्त कर लेती है। बताया जाता है कि शहरों में स्मैक के शिकार बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

ये बच्चे 13 से 42 वर्ष तक के होते हैं। इसका नशा शुरुवात में 8 घंटे तक प्रभावी होता है जो धीरे धीरे कम होता जाता है। इस नशे से ऊपर अब नशीले इंजेक्शन आ गए हैं जो युवाओं को तेजी से खत्म कर रहे हैं।

  हल्द्वानी पुलिस को हल्द्वानी निवासी एक महिला ने शिकायत पत्र देकर कहा कि उनका 17 वर्षीय पुत्र शुभम नशे का आदि है, जिसे हल्द्वानी के एक नशा मुक्ति केंद्र में 2 माह पूर्व सुधारने के लिए भर्ती कराया गया था। बीती 21अप्रैल को वो अपने पुत्र से मिलने गई और उस समय शुभम सामान्य अवस्था में था। शिकायत की गई है कि उसी दिन शाम को उन्हें सूचना दी गई कि शुभम बेहोश हो गया है और उसे सुशीला तिवारी अस्पताल पहुंचाया गया है। 

अस्पताल में शुभम की देखरेख के लिए नशा मुक्ति केंद्र का कोई भी अधिकारी/कर्मचारी मौजूद नहीं था। चिकित्सकीय जांच से पता चला कि शुभम की किडनी और लीवर गंभीर रूप से प्रभावित हैं और वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर है।

 पुलिस कप्तान मंजूनाथ टीसी ने इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच उप निरीक्षक अविनाश मौर्य को सौंपी। जांच अधिकारी ने पाया कि संबंधित नशा मुक्ति केंद्र बिना पंजीकरण चल रहा है और नाबालिग को अवैध रूप से अपने संरक्षण में रखकर उपचार किया गया जो एक घोर लापरवाही है। पुलिस ने इस आधार पर एफ.आई.आर.दर्ज कर 50/26, धारा 125 बी.एन.एस.एवं धारा 87/108 मानसिक स्वास्थ्य देखरेख अधिनियम 2017 के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया।
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