हल्द्वानी। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलन में पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राज्य आंदोलनकारियों, पूर्व सैनिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग उठाई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य का गठन पहाड़ के विकास, स्थानीय युवाओं को रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पलायन रोकने के उद्देश्य से हुआ था। लेकिन राज्य गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल अनसुलझा है। उनका मानना है कि जब तक शासन-प्रशासन का केंद्र पहाड़ में नहीं होगा, तब तक पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं का प्रभावी समाधान मुश्किल रहेगा।
पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड के संस्थापक अध्यक्ष और आंदोलन के संयोजक हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण केवल राजधानी का मुद्दा नहीं, बल्कि पहाड़ के विकास और राज्य आंदोलनकारियों के सपनों से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि स्थायी राजधानी गैरसैंण बनने से पहाड़ में सरकारी गतिविधियां और आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने, पलायन कम करने और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है।
हरीश रावत ने कहा कि आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मूल भावना और पर्वतीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की।
पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी बोले – युवाओं के भविष्य के लिए जरूरी संघर्ष
चमोली जिले के कर्णप्रयाग से हल्द्वानी पहुंचे पूर्व आईएएस अधिकारी एवं पूर्व राज्य सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि उन्होंने उत्तराखंड को बनते हुए देखा है, लेकिन आज राज्य की परिस्थितियों को देखकर दुख होता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। देहरादून में 106 दिन तक आंदोलन करने और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाने के बाद अब कुमाऊं में भी इस मांग को मजबूती से उठाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष उत्तराखंड के युवाओं के बेहतर भविष्य और राज्य को समृद्ध बनाने के लिए है। उन्होंने जनता से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की।
दो गोलियां खाने वाले राज्य आंदोलनकारी ने सुनाई संघर्ष की कहानी
नंदप्रयाग से पहुंचे 78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमोड़ी ने राज्य आंदोलन के दौरान झेली गई कठिनाइयों को याद किया। उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरी में रहते हुए भी वह आंदोलन में शामिल हुए थे। इस दौरान उनके पैर में दो गोलियां लगी थीं और तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि लंबे संघर्ष और बलिदान के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों को आज भी अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि जिस पर्वतीय राज्य की कल्पना के साथ आंदोलन किया गया था, वर्तमान परिस्थितियां उससे अलग दिखाई देती हैं।
पूर्व सैनिकों और समाजसेवियों ने भी उठाई आवाज
मासी से पहुंचे पूर्व सैनिक आनंद राम ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने से पर्वतीय राज्य की अवधारणा मजबूत होगी और पहाड़ के विकास को गति मिल सकती है।
देहरादून से आए ओएनजीसी के 76 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी रमेश पलियाल ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान स्थानीय संसाधनों पर लोगों के अधिकार, युवाओं को रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का सपना देखा गया था। उन्होंने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग उन सपनों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
टिहरी निवासी अनिल बहुगुणा ने कहा कि सरकार और शासन का केंद्र पहाड़ में होने से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता मिल सकती है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाने और दूरस्थ गांवों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
स्थायी राजधानी के साथ मूल निवास और भूमि नीति का मुद्दा भी उठा
चखुटिया से पहुंचे पूर्व सैनिक और आंदोलनकारी भुवन कठेत ने मूल निवास कानून, स्थानीय युवाओं के रोजगार और भूमि संबंधी नीतियों पर ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी नीतियां बनाना जरूरी है।
बागेश्वर के गागरीगोल से पहुंचे छतर सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में विकास की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाकर शासन-प्रशासन को पहाड़ के करीब लाने की मांग की।
आंदोलनकारियों का संकल्प-मांग पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष
आंदोलन के संयोजक हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पर ठोस निर्णय होने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया।







