बजट 2026 में रक्षा, कर सुधार और मुकदमेबाजी कम करने पर जोर

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हल्द्वानी । केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कर प्रणाली में सुधार को प्राथमिकता दी है। डिफेंस बजट में की गई बढ़ोतरी को वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से समय की आवश्यकता बताया जा रहा है। टैक्स बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुमित गुप्ता का मानना है कि इससे सशस्त्र बलों की क्षमता मजबूत होगी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

बजट में मोटर एक्सीडेंट क्लेम की राशि को आयकर में छूट के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है, जिसे आम जनता के लिए राहतकारी कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही आयकर कानून में विभिन्न मामलों में सजा की बजाय पेनाल्टी का प्रावधान कर, करदाताओं को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचाने का प्रयास किया गया है। सरकार का उद्देश्य लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा कर न्यायिक बोझ को कम करना है।

एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत अब पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही शुरू होने के बाद भी अद्यतन रिटर्न (आईटीआर-यू) दाखिल किया जा सकेगा। नए प्रावधानों के अनुसार, कर निर्धारण अधिकारी द्वारा आईटीआर-यू को केवल मूल्यांकन उद्देश्यों के लिए विचार किया जाएगा। साथ ही, कर निर्धारण प्रक्रिया चालू रहने के दौरान भी करदाता 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर का भुगतान कर आईटीआर-यू दाखिल कर सकेंगे।

यह व्यवस्था मुकदमेबाजी को कम करने और स्वैच्छिक कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित होगी। कुल मिलाकर बजट 2026 में सुरक्षा, कर सुधार और करदाताओं को राहत देने के प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

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