हल्द्वानी। बनभूलपुरा रेलवे भूमि से जुड़े अतिक्रमण मामले में अब 9 सितंबर की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष मामले को बुधवार की सुनवाई सूची में तीसरे नंबर पर रखा गया है। ऐसे में लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार कर रहे प्रभावित परिवारों, रेलवे, राज्य सरकार और अन्य पक्षों की निगाहें अब शीर्ष अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं।
मामले में पिछले करीब दो महीने से सुनवाई की तारीखें लगती रही हैं, लेकिन केस की क्रम संख्या अ#Nainitalliveधिक होने के कारण कई बार सुनवाई नहीं हो सकी। रेलवे और उत्तराखंड सरकार की ओर से जल्द सुनवाई का अनुरोध किए जाने के बाद अब 9 सितंबर को सुनवाई होने की उम्मीद है। हालांकि, अदालत की कार्यवाही और आदेश को लेकर अंतिम स्थिति सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
वर्षों से अदालत की चौखट पर है मामला
रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने का मामला वर्ष 2007 से न्यायालयों में विचाराधीन है। वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने रेलवे को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 2017 में भी कार्रवाई से जुड़े निर्देश सामने आए, लेकिन मामला आगे भी न्यायिक प्रक्रिया में बना रहा।
21 मार्च 2022 को इस विषय से जुड़ी एक और जनहित याचिका नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल हुई। इसके बाद मई और दिसंबर 2022 में अदालत में मामले की सुनवाई हुई। दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली पर लगाई थी रोक
मामला शीर्ष अदालत पहुंचने के बाद जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल ध्वस्तीकरण/बेदखली की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 24 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावित लोगों को हटाने से पहले पुनर्वास के पहलू पर विचार करने की जरूरत बताई थी।
अदालत ने रेलवे, केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार और संबंधित विभागों को आपस में बैठक कर प्रभावित लोगों के पुनर्वास की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए थे।
इस मामले का मानवीय पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय से रह रहे परिवारों के लिए यह सिर्फ जमीन का कानूनी विवाद नहीं है, बल्कि घर, परिवार, रोजी-रोटी और भविष्य की चिंता से जुड़ा सवाल है।
वहीं रेलवे और सरकार का पक्ष भी भूमि से जुड़े अपने दावों और कानूनी अधिकारों को लेकर अदालत के सामने है। ऐसे में 9 सितंबर की सुनवाई में आने वाला कोई भी आदेश इस पूरे मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अलर्ट
मामले की संवेदनशीलता और बड़ी संख्या में प्रभावित परिवारों को देखते हुए सुनवाई के दिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। गृह विभाग की ओर से जिला प्रशासन और पुलिस को आवश्यक सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती समेत अन्य व्यवस्थाएं की जा सकती हैं।
अब 9 सितंबर का इंतजार
करीब दो दशक से अलग-अलग न्यायिक मंचों पर चल रहे इस विवाद में अब एक बार फिर 9 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर सामने आई है। हल्द्वानी के बनभूलपुरा से लेकर पूरे उत्तराखंड की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की ओर हैं।
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