हल्द्वानी।
बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण प्रकरण में 24 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के चार दिन बाद Supreme Court of India ने आदेश की आधिकारिक प्रति जारी कर दी है।
सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवेदन करने का अवसर देने और इसके लिए पुनर्वास शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
19 मार्च के बाद लगेंगे पुनर्वास शिविर
24 फरवरी 2026 को पारित आदेश के अनुसार, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (USLSA) स्थल पर विशेष शिविर आयोजित करेगा।
शिविर 19 मार्च 2026 के बाद लगाए जाएंगे। यानी ईद के बाद कैंप लगाए जाएंगे।
लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक आवेदन प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
शिविरों में सदस्य सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों की टीम मौजूद रहेगी।
अदालत ने कहा कि शिविरों के माध्यम से वहां रह रहे प्रत्येक परिवार के मुखिया को योजना के तहत आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाए।
30 हेक्टेयर भूमि पर 4,300 से अधिक मकान
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लगभग 30 हेक्टेयर से अधिक रेलवे/सरकारी भूमि पर करीब 4,300 से अधिक मकान बने हैं, जिनमें 50 हजार से ज्यादा लोग निवास कर रहे हैं।
रेलवे परियोजना के तहत लाइन के रियलाइन्मेंट के लिए लगभग 30.65 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यह अंतरिम संरक्षण सभी कथित कब्जाधारियों पर सामान्य रूप से लागू नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक मामले का निस्तारण केस-टू-केस आधार पर किया जाएगा।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत की संभावना
अदालत ने यह भी माना कि क्षेत्र में रहने वाले कई परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) में आ सकते हैं। ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के लिए आवेदन का अवसर दिया जाना न्यायोचित होगा।
USLSA को सामाजिक कार्यकर्ताओं और काउंसलरों की मदद से घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि कोई पात्र परिवार प्रक्रिया से वंचित न रहे।
₹2000 प्रति माह एक्स-ग्रेशिया सहायता
सुनवाई के दौरान यह भी अवगत कराया गया कि रेलवे और राज्य सरकार संयुक्त रूप से प्रत्येक पात्र परिवार के मुखिया को ढांचे हटाने के मद में छह माह तक ₹2000 प्रति माह की एक्स-ग्रेशिया सहायता देंगे।
अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि वह प्रत्येक परिवार की पात्रता की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
अब सबकी निगाहें 28 अप्रैल 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तथ्य और दलीलें तय करेगी और यह स्पष्ट होगा कि पुनर्वास प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य का है।




