अमेरिका-इजरायल गठजोड़ के आगे आत्मसमर्पण शर्मनाक : डॉ कैलाश पाण्डेय

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शहीदे आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस 23 मार्च से शुरू हुए भाकपा माले के ‘साम्राज्यवाद विरोधी- युद्ध विरोधी सप्ताह अभियान’ के तहत दमुआढूंगा में एक बैठक आयोजित की गई.

वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ पूरे भारत में स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाली इन महान क्रांतिकारियों की शहादत के “इंकलाब जिंदाबाद” और “साम्राज्यवाद का नाश हो” के नारे आज के दौर में और अधिक सार्थक हो उठे हैं.

भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, मोदी की सत्ता कॉरपोरेट हितों और साम्राज्यवादी ताकतों के प्रभाव में काम कर रही है. अमेरिका—इजरायल की युद्धोन्मादी धुरी के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत को आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय अलगाव की ओर धकेल दिया है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लाखों भारतीय प्रवासी कामगार असुरक्षा के माहौल में फंसे हुए हैं.

उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि और व्यापार नीतियों के जरिए छोटे किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है. अमेरिका के साथ असमान व्यापार समझौते भारतीय कृषि को गंभीर संकट में डाल रहे हैं.

प्रेम राम आर्य ने कहा कि, कथित राष्ट्रवादियों की इस सरकार ने देश की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों से समझौता कर दिया है, जिससे भारत अपने पारंपरिक मित्र देशों—विशेषकर रूस, ईरान—से दूर होता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है. साथ ही इस गलत विदेश नीति ने जनता को गंभीर गैस-तेल में डाल दिया है.

अंत में वक्ताओं ने आह्वान किया कि वर्तमान परिस्थितियों में भगत सिंह की साम्राज्यवाद-विरोधी विरासत को मजबूत करते हुए जनप्रतिरोध को व्यापक और तेज किया जाए. उन्होंने कहा कि यह समय अन्याय, शोषण और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष को नई ऊंचाई देने का है.

इस अवसर पर डॉ कैलाश पाण्डेय, प्रेम राम आर्य, आकाश भारती, पंकज अम्बेडकर, हरीश कुमार लोधी, संजय कुमार, महेश कुमार, मथुरा प्रसाद, रितिक कांत, जतिन आर्या, आयुष आर्य, नितिन आर्या शामिल रहे.

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