उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चारधाम यात्रा में फैली अव्यवस्थाओं और तीर्थस्थलों में पशुओं के साथ हो रही क्रूरता के मामले पर पशु प्रेमी गौरी मौलेखी और धर्मगुरु अजय गौतम समेत अन्य जनहित याचिकाओं में सुनवाई की। मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने तीर्थस्थलों में जानवरों पर हो रहे अत्याचार को कम करने और श्रद्धालुयों की यात्रा को सरल सुगम बनाने के लिए सरकार की तरफ से जारी एस.ओ.पी.में संसोधन करने को कहा है। न्यायालय ने मार्ग में चलने वाले पशुओं के लिए चिकित्सालय के बारे में पशु प्रेमी द्वारा दिये सुझाव पर विचार करने को कहा है। मामले में अब तीन सप्ताह बाद सुनवाई होनी है।
आज हुई सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि यात्रा को सरल सुगम व पशुओं की देखभाल क़रने के लिए पूर्व में ही सरकार ने नई एस.ओ.पी.जारी कर दी गयी है, जिसपर न्यायालय ने कहा कि यात्रा में किसी को कोई परेशानी न हो इसलिए एस.ओ.पी.का एक बार पुनः मूल्यांकन किया जाय।
मामले के अनुसार समाजसेवी पशु प्रेमी गौरी मौलेखी और धर्मगुरु अजय गौतम व अन्य ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि उत्तराखंड के चारधाम सहित अन्य तीर्थ स्थलों में फैली अवस्थाओं व जानवरों पर हो रहे अत्याचार को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा जो एसओपी बनायी गई है। उसका अनुपालन सही तरीके से नही हो पा रहा है।



